NARCOTICS CONTROL BUREAU
MINISTRY OF HOME AFFAIRS
GOVERNMENT OF INDIA

नशीले पदार्थों के प्रभाव

  1. उत्तेजक प्रभाव

    अन्य उत्तेजक ड्रग्स जैसे कि कोकीन और एम्फेटामिन उत्तेजनाकारी तंत्रिका-संचारकों (न्यूरोट्रांसमिटर) की निर्मुक्ति (रिलीज़)  पर गहरा प्रभाव डालते हैं और इस प्रकार जागृत अवस्था और आमूलतः बदली हुई मनोदशा की स्थिति उत्पन्न करते हैं। इसी कारण से यह उत्तेजक पदार्थ कई बार “स्पीड“ नाम से जाने जाते हैं।

2.अवसादकों के प्रभाव

    अवसादक औषधियां जैसे कि अल्कोहल और हेरोइन भी मनोदशा  और व्यक्तित्व पर ऐसा ही प्रभाव डालते हैं लेकिन ये निरोधक रासायनिक घटकों को भी  सक्रिय करते हैं। तथापि लंबे समय तक ऐसे नशीले पदार्थों के बारंबार प्रयोग के कारण शरीर अपने अन्दर स्वयं ही प्राकृतिक रुप से बनने वाले निरोधक रसायनों की मात्रा को अनुकूल बनाने लग जाता है। इससे शरीर की ड्रग्स को खपाने की प्रवृत्ति बढ़ती जाती है। इच्छित प्रभाव लाने के लिए इन ड्रग्स की अधिक से और अधिक मात्रा लेनी पड़ती है। ड्रग्स के प्रभावों को झेलने की क्षमता का निर्माण करते-करते प्रयोक्ता, शारीरिक ड्रग्स निर्भरता के रास्ते पर शायद शुरुआती कदम रख रहा होता है।

  1. विभ्रमकारी प्रभाव

    विभ्रमजनक नशीले पदार्थ जैसे एल एस डी और कुछ ‘मैजिक’ मशरूम, दिमाग के उन मार्गों पर असर डालते हैं जो कि संवेदी बोध और विचार श्रृंखला को नियंत्रित करते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ये संदेश ग्रहण करने और उसका तात्‍पर्य निकालने के तरीके को बदल देते हैँ। विभ्रमकारी नशीले पदार्थों द्वारा मनोदशा और व्यक्तित्व मेँ आए बदलाव प्रकृति द्वारा अधिक प्रभावित होते हैँ बजाए कि केंद्रीय तंत्रिका-तंत्र के अंदर इन ड्रग्स की विशुद्ध रूप से औषधीय गुणों की सहज प्रक्रिया के कारण।

  1. दोहरे असर वाले नशीले पदार्थ

    ड्रग्स के नए प्रकार के समूह जिनका कि दोहरा असर हो सकता है, ने पूरे परिदृश्य को और जटिल कर दिया है। ये उत्तेजक, मनोविकृतिकारी होते हैँ जिनमेँ से एक्‍स्‍टेसी सबसे जानी पहचानी है। एक्‍स्‍टेसी जिसका वैज्ञानिक नाम मेथिलीनडाइऑक्सीमेथिलएम्फेटामिन  (एम डी एम ए) है, जो कि एम्‍फेटामिन से संबंधित एक कृत्रिम यौगिक वर्ग की है । इस वर्ग से जुड़े होने के कारण एक्‍स्‍टेसी में एम्‍फेटामिन जैसे उत्तेजनाजनक गुण-धर्म होते हैँ लेकिन इसके कुछ प्रभाव एल एस डी  से भी मिलते-जुलते हैं। यह दिमाग पर ठीक उसी तरीके से असर करता है जिस प्रकार  एल एस डी  के प्रयोग द्वारा   न्‍यूरोट्रांसमीटर सेरोटोनिन के रिलीज करने से होता है। प्रयोगकर्ता बताते हैँ कि इससे अधिक प्रसन्नता की अनुभूति होती है और दूसरोँ के लिए सहानुभूति का अधिक एहसास होता है ।