NARCOTICS CONTROL BUREAU
MINISTRY OF HOME AFFAIRS
GOVERNMENT OF INDIA

औषध नियंत्रण की कार्यनीति तथा नीति

स्‍वापक औषधि‍ एवं मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम 1985 (एनडीपीएस अधिनियम) ने भारत में औषध कानून प्रवर्तन के लिए एक सांविधिक ढांचा निर्दिष्ट किया है। यह अधिनियम उस समय के मुख्य अधिनियमों जैसे अफीम अधिनियम 1857, अफीम अधिनियम 1878 तथा खतरनाक औषध अधिनियम 1930 को समेकित करता है। एनडीपीएस अधिनियम विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय अभिसमयों के अधीन भारत के दायित्‍वों के कार्यान्वयन हेतु बनाए गए प्रावधानों को भी समाविष्ट करता है। अधिनियम में औषध के अवैध व्यापार से अर्जित संपत्ति की जब्ती तथा रसायनों व स्वापक औषध एवं मन:प्रभावी पदार्थों के विनिर्माण में प्रयोग होने वाले पदार्थों पर नियंत्रण हेतु 1989 में कुछ महत्वपूर्ण संशोधन किए गए थे। इन पदार्थों से संबंधित सांविधिक प्रावधानों को कार्यान्वित करने हेतु भारत सरकार ने 1993 में ऐसे किसी पदार्थ जिसे सरकार द्वारा इस अधिनियम के अंतर्गत नियंत्रित पदार्थ घोषित किया जाए, के विनिर्माण, वितरण, आयात, निर्यात, परिवहन इत्यादि के नियंत्रण, विनिमयन, अनुवीक्षण हेतु एनडीपीएस (नियंत्रित पदार्थों का विनियमन) नाम से एक आदेश जारी किया। इसके फलस्वरुप भारत में सांविधिक शासन औषध-व्यापार, औषध संबंधी संपत्ति के साथ स्वापक औषध एवं मन:प्रभावी पदार्थों के विनिर्माण में प्रयोग किए जा सकने वाले पदार्थों की व्याख्या करता है। 2001 में एनडीपीएस अधिनियम में मुख्यतः श्रेणीबद्ध सजा आरंभ करने हेतु कुछ संशोधन समाविष्ट किए गए।

 

भारत में मुख्य स्वापक औषध केन्द्रित क्षेत्रों में शामिल है:-

  1. आयात बिंदुओं तथा भूमि सीमाओं पर निगरानी तथा प्रवर्तन।
  2. ज्ञात स्वापक नियंत्रण औषध मार्गों पर निवारण तथा निषेध करना।
  3. निर्यात बिंदुओं पर नियंत्रण उपाय जैसे कि वायु-यात्री टर्मिनल, कारगो टर्मिनल तथा विदेश डाकघर इत्यादि।
  4. विभिन्न स्वापक कानून प्रवर्तन अभिकरणों के बीच उन्नत समन्वय।
  5. भांग तथा अफीम पोस्त की अवैध खेती तथा जंगली उपज की पहचान करना तथा उनको समाप्त करना।
  6. प्रचालन आसूचना के संग्रहण, परितुलन, विश्लेषण तथा विकीर्णन में सुधार हेतु आसूचना तंत्र को सुदृढ़ बनाना।
  7. अन्वेषण तथा परस्पर विधिक सहायता के साथ-साथ प्रचालन तथा दीर्घ अवधि आसूचना दोनों में अंतरराष्ट्रीय समन्वय बढ़ाना।